Tuesday, October 31, 2017

इंतजार हुअा खत्म, नोकिया 2 भारत में लांच

इंतजार हुअा खत्म, नोकिया 2 भारत में लांच

जालंधरः एचएमडी ग्लोबल की स्वामित्व वाली कंपनी नोकिया ने अाज अपने नए स्मार्टफोन नोकिया 2 को दिल्ली NCR में अायोजित एक इंवेट के दौरान लांच कर दिया है। इस स्मार्टफोन की कीमत 99 यूरो (लगभग 7,465 रुपए) रखी गई है। लांच इवेंट में कंपनी ने दावा किया है कि इस स्मार्टफोन को अाने वाले समय में एंड्रॉयड Oreo की अपडेट दी जाएगी। गूगल असिस्टेट से लैस इस स्मार्टफोन की बिक्री नवंबर के महीने से शुरू होगी।
नोकिया 2 के फीचर्सः

4100mAh की बैटरी के साथ भारत में लॉन्च हुआ Nokia 2, कीमत 7,000रु. से कम

नोकिया 2 आखिरकार भारत में लॉन्च हो गया है। आपको बता दें कि नोकिया 2 सबसे पहले भारत में लॉन्च हुआ है। इस फोन के खासियत की बात करें तो इसमें 4100mAh की बैटरी है जिसे लेकर कंपनी का दावा दो दिन के बैकअप का है। नोकिया के इस फोन...

Monday, October 30, 2017

स्वस्थ जीवन दैनिक व्यायाम के सौंदर्य लाभ

कार्य करना न केवल आपकी आकृति में मदद करता है, बल्कि आपके रंग को भी बेहतर बनाता है जानें कि क्यों मुँहासे, झुर्रियों, नीरस त्वचा और अधिक के लिए व्यायाम सबसे अच्छा त्वचा उपचार में से एक हो सकता है


व्यायाम करने के लिए बहुत सारे कारण हैं कुछ लोगों के लिए, यह इसलिए है क्योंकि आपने समुद्र तट की अवकाश बुक किया है, जबकि अन्य स्वस्थ रहने पर केंद्रित हैं। चाहे आपकी प्रेरणा क्या है, हम सभी सहमत हो सकते हैं कि व्यायाम के लाभ स्पष्ट हैं। लेकिन एक चोरी का भुगतान है: स्वस्थ त्वचा त्वचा और सौंदर्य पुरस्कार के बारे में अधिक जानने के लिए पढ़ें, जो नियमित रूप से पसीने के लिए काम करते हैं।

इंस्टेंट ग्लो

नोएलले एस। शेरबर, एमडी, बाल्टीमोर, मैरीलैंड में स्थित बोर्ड-प्रमाणित त्वचाविज्ञान के अनुसार, जब आप एरोबिक व्यायाम से अपना दिल पम्पिंग करते हैं, तो आप ऑक्सीजन युक्त रक्त की एक अच्छी खुराक के साथ आपकी त्वचा की आपूर्ति कर रहे हैं। "यह आपको महान पोस्ट-कसरत चमक देता है।"

शिकन कमी

कार्य करने से तनाव-संबंधित हार्मोन कोर्टिसोल के स्वस्थ स्तर को बनाए रखने में भी मदद मिलती है, शेर कहते हैं। "एलिटेट्रेटेड कोर्टिसोल के स्तर में सीबम उत्पादन में बढ़ोतरी से जुड़ा हुआ है, जिसका मतलब है कि अधिक मुँहासे के ब्रेकआउट हैं"। बहुत ज्यादा कोर्टिसोल त्वचा में कोलाजेन को तोड़ने के लिए भी पैदा कर सकता है, शेर कहते हैं, जो झुर्रियां और सगिंग बढ़ा सकते हैं लॉस एंजिल्स स्थित व्यायाम फिजियोलॉजिस्ट और सेलिब्रिटी ट्रेनर एमी डिक्सन कहते हैं, "व्यायाम वास्तव में कोलेजन के उत्पादन का समर्थन करता है।" "इस प्रोटीन में बढ़ावा आपकी त्वचा फर्म, कोमल और लोचदार रखने में मदद करता है।"

Sunday, October 29, 2017

5 स्टेप्स में सीखें, Whatsapp पर कैसे करें Auto-reply

5 स्टेप्स में सीखें, Whatsapp पर कैसे करें Auto-reply
इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप वॉट्सएप दुनियाभर में मौजूद यूजर्स के बीच पॉपुलर है। यूजर्स के बीच इस ऐप की पॉपुलरिटी बनाए रखने के लिए कंपनी वॉट्सएप को लगातार फीचर्स अपडेट कर रही है। वॉट्सएप पर हाल ही में डिलीट फॉर ऑल, ग्रुप वीडियो कॉलिंग और लोकेशन शेयर जैसे फीचर्स आए हैं।
यूजर्स जानते ही होंगे कि वॉट्सएप पर अभी तक ऑटो रिप्लाई का फीचर नहीं आया है। लेकिन क्या आपको पता है कि आप वॉट्सएप पर आटो रिप्लाई ऑप्शन यूज कर सकते हैं। यानी अपने फोन को बिना छुए अपने किसी भी दोस्त या परिवार वाले को रिप्लाई कर सकते हैं।

वॉट्सएप पर ऑटो रिप्लाई करने के लिए आपको Auto-reply for WhatsApp ऐप डाउनलोड करना होगा। ये एक फ्री ऐप है, जो आपको गूगल प्लेस्टोर पर मिल जाएगा।

इंस्टॉल होने के बाद इसे ओपन करें। यहां आपसे नोटिफिकेशन Read करने की परमीशन मांगी जाएगी। इसे Ok कर दें।
पढ़ें- मार्केट में खुलेआम बिक रहे हैं नकली मैमोरी कार्ड, ऐसे करें पहचान

इसके बाद आपकी स्क्रीन पर Auto-reply for WhatsApp को ऑन करने का विकल्प आएगा। इसे ऑन कर दें। अब Allow पर क्लिक कर दें।

इसके बाद नीचे एक + का साइन दिया गया होगा। इसे क्लिक करें। यहां से आप अपने फोन में मौजूद किसी भी कॉन्टेक्ट को एड कर सकते हैं।
पढ़ें- 20100 mAh बैटरी वाले ये हैं दमदार 5 पावर बैंक, कीमत 1500 रुपए से शुरू



अगर आप सभी कॉन्टेक्ट्स के मैसेज का ऑटो रिप्लाई करना चाहते हैं, तो सबसे ऊपर दिए गए ऑप्शन Auto-reply for all messages को ऑन कर दें। इस ऑप्शन को ऑन करने के बाद नीचे मैसेज का ऑप्शन नजर आएगा। यहां मैसेज कर सकते हैं।

Saturday, October 28, 2017

इन घरेलू नुस्खों से दूर होंगी आंखो की समस्याएं और बढ़ेगी रोशनी


इन घरेलू नुस्खों से दूर होंगी आंखो की समस्याएं और बढ़ेगी रोशनी
ये दुनिया कितनी सुंदर है और इसको देखने में भी बहुत अच्छा लगता है। हम नजारे लेते है और खुश होते है। इन सबके पीछे सिर्फ एक ही वजह है और वो है आपकी आंखे लेकिन सोचों अगर आपकी आंखे ही ना रहें तो क्या होगा। जी हां आंखें भी प्रकृति द्वारा हमें दिया गया एक ऐसा ही अनमोल उपहार है जिससे हम दुनिया की सुंदरता का अवलोकन कर आनंदित होते हैं।
आपकी आंखें हैं अनमोल, ये टिप्स अपनाकर अपनी आंखें रखें सलामत




इसलिए इनकी सुरक्षा एवं स्वास्थ्य के लिए सजग रहना हमारे लिये प्राथमिकता पर होना चाहिए। लेकिन कई बार आंखों की समस्याएं हमें आ घेरती हैं। ऐसी ही एक समस्या है आई स्टाई। दरअसल आई स्टाई आंखों में होने वाला एक प्रकार का इंफेक्शन है जिसमें पलक पर या आंख के निचले भाग में एक लाल रंग की चोट जैसी दिखती है।
क्यों आजकल के युवा है दुबलेपन का शिकार, इन चीजों को करना आज ही बंद कर दें
हालांकि ये स्टाई हानिरहित होते हैं, इनमें वे खुजली या दर्द भी हो सकता है। इन सारी समस्याओं से आपको बचना चाहिए क्योंकि आंखे बहुत ज्यादा जरूरी हिस्सा होता है। आइए जानते है.....
इन घरेलू नुस्खों से दूर होंगी आंखो की समस्याएं और बढ़ेगी रोशनी
एलोवेरा
इस समय आपकी आंखों के लिए कोई भी लापरवाही आपके लिए खतरनाक साबितो हो सकती है। इसको सुरक्षित रखने के लिए नेचुरल तरीके अपनाएं जा सकते है। आपको आंखो की एलोवेरा आंखों की समस्‍याओं के लिए एक सरल और प्रभावशाली घरेलू उपचार है।

इन घरेलू नुस्खों से दूर होंगी आंखो की समस्याएं और बढ़ेगी रोशनी
स्टाई को ठीक करता है
यह स्टाई को भी ठीक करता है उपचार के लिए एलोवेरा जूस को शहद और एल्डरबेर्री चाय के साथ मिलाकर इस द्रव्य मिश्रम से आंखों को दिन में दो बार धोने से न सिर्फ आंखों से आई स्टाई की समस्या दूर होती है बल्कि आंखें साफ और सुंदर भी होती हैं। इसलिए आपको एलेवेरा का इस्तेमाल करना चाहिए।

इन घरेलू नुस्खों से दूर होंगी आंखो की समस्याएं और बढ़ेगी रोशनी
ऐसे करें प्रयोग
आपको बता दें कि आप इसकी सहायता से किस तरह अपनी आंखों को स्वस्थ रख सकते है। आप आम दिनों में भी इसकी मदद से आंखों को साफ और रोग मुक्त रख सकते हैं। इसके प्रयोग के लिए किसी साफ-सुथरे मिट्टी या फिर स्टील के पात्र में दो चम्मच त्रिफला चूर्ण रात्रि एक गिलास पानी में भिगो कर, प्रात: स्वच्छ हाथों से खूब मलकर साफ कपड़े में छान लें। अब इस जल से आंखों को धीरे-धीरे छींटे मारकर धोना चाहिए जिससे प्राकृतिक पोषण मिलता है। इससे आपकी आंखों को आराम के साथ साथ रोशनी भी बढ़ती है।

इन घरेलू नुस्खों से दूर होंगी आंखो की समस्याएं और बढ़ेगी रोशनी
गुलाब जल
आपको बता दें कि आंखो के लिए हमेशा गुलाबजल को अच्छा माना जाता रहा है और आंखों में संक्रमण के लिए गुलाबजल अच्‍छा उपचार होता है। संक्रमण या स्टाई से बचने के लिए 2 से 3 बूंदें गुलाबजल आंखों में डालने से तीन दिन के अंदर ही संक्रमण को प्रभावी ढंग से ठीक किया जा सकता है। इसके प्रयोग से आपकी आंखे हमेशा जवां रहेगी।

इन घरेलू नुस्खों से दूर होंगी आंखो की समस्याएं और बढ़ेगी रोशनी
आंखों को तरोताजा बनाता है
गुलाब जल ना सिर्फ आंखो की बीमारियों को ठीक करने में मदद करता है बल्कि ये आंखों को साफ रखने के साथ साथ अन्हें तरो-तजा बनाता है उनकी थकान भी दूर करता है। इससे आंखो की दिनभर की थकान उतर जाती है और आप फ्रेश महसूस करते है।

इन घरेलू नुस्खों से दूर होंगी आंखो की समस्याएं और बढ़ेगी रोशनी
धनिए के बीजों से उपचार
आपकी आंखो में अगर किसी भी तरह की कोई समस्या है या आपको स्टाई की समस्या है तो आपको इसके इलाज के लिए धनिये के बीज बहुत प्रभावी होते हैं। उपचार के लिए सबसे पहले पानी में धनियों के कुछ बीज डालें और उबाल लें। अब बीडों को पानी से छानकर बाहर कर दें और इस पानी से आंखों को धोएं।

इन घरेलू नुस्खों से दूर होंगी आंखो की समस्याएं और बढ़ेगी रोशनी
स्टाई की समस्या दूर हो जाएगी
अगर आपने इस तरह से अपनी आखों का उपचार कर लिये तो इस उपचार को दिन में कई बार दोहराएं, जल्द ही स्टाई की समस्या दूर हो जाएगी। ये आपकी आंखो के लिए बहुत उपयोगी है। इससे आंखों का इलाज करें और स्वस्थ रहें।

इन घरेलू नुस्खों से दूर होंगी आंखो की समस्याएं और बढ़ेगी रोशनी
लहसुन के रस से इलाज
आपने घर में लहसुन तो खाया ही होगा। ये छोटा दिखने वाला लहसुन बहुत बड़े काम का होता है। लहसुन के रस में जीवाणुरोधी गुण होते हैं, जो आई स्टाई को दूर करने में मददगार होते हैं। उपचार के लिए ताजा लहसुन का रस स्टाई पर लगाएं, लेकिन ध्यान रहे कि कैसे भी यह रस आंख के भीतर न जा पाए। सूख जाने पर इसे हल्के कुनकुने पानी से धो दें। इससे आपकी आंखो की रोशनी भी नहीं जाती है और आपकी आंखो से समस्या भी खत्म हो जाती है।

इन घरेलू नुस्खों से दूर होंगी आंखो की समस्याएं और बढ़ेगी रोशनी
ग्रीन टी के बैग से करें इलाज
आपके स्वास्थ्य के लिए तो ग्रीन टी बहुत ज्यादा फायदेमंद होती है। लेकिन क्या आपको पता है कि इसको हम दवा की तरह भी इस्तेमाल कर सकते है। यह आंखों में एलर्जी के लिए भी फायदेमंद होता है। आई स्टाई को ठीक करने के लिए एक कुनकुने टी बैग को स्टाई की जगह रख दें और ठंडा होने तक वहीं रखा रहने दें।

इन घरेलू नुस्खों से दूर होंगी आंखो की समस्याएं और बढ़ेगी रोशनी
आंखो का दर्द दूर होता है
आपको बता दें कि इसका इस्तेमाल करने से आपकी आंखो का दर्द भी दूर हो जाता है और आपकी आंखो को आराम मिलता है। इसके लिए आपको पानी में दो ग्रीन टी के पैकेट डालें और इसको ठंडा होने दें। इसके बाद उसको आंखो में रखें। फिर आंखों को धो ले आपकी समस्या खत्म हो जाएगी।

Friday, October 27, 2017

Malabar Neem plants Product Description:

Product Description:
Melia dubia is a very fast growing tree. Melia dubia is also known as Melia composita. The wood of Melia dubia is in high demand in Veneer, Plywood, Pulp, Match stick and Packing case industry. There is a high demand-supply gap in these industries. Each tree of appropriate girth can fetch up to Rs 4000 ? 5000 per tree over a 6-7 year period if sold as veneer. However, income is also generated after 2-3 years if sold to matchstick industries. Melia dubia is known by different names in regional languages: Marathi: Kuriaput, Gujarati: Kadukajar, Nimbara, Ambaro, Limbaro, Nibara Oriya: Batra Kannada: Hebbevu Telugu: Munnattikaraka Tamil: Maali vembu Hindi: Ghora-nim, Mahanim Its TRADE NAME is Malbar Neem wood. Melia dubia should not be confused with Melia azedarach. At the nursery stage, both look similar. While it is difficult to grow Melia dubia seedlings ( germination % is as low as 10 % ), it is easy to grow Melia azedarach. Melia azedarach is not fast growing and its wood is not in demand. We can supply genuine Melia dubia seedlings anywhere in India. We raise the Melia dubia plants in the nursery and do not collect the seedlings from the forest floor unlike others. Therefore, our plants are of uniform age and height and do not have root deformities. We are professional nurserymen with wide and several years? experience in Agro and Farm forestry sector and you can depend on us for quality and genuinity of the planting stock of Melia dubia we supply. Please note that Melia dubia grows well where rainfall is above 700 ? 1000 mm per year in rain fed conditions or where irrigation is available in the form of drip irrigation. It can not tolerate

मेलिया डुबिया को मेलिया कंपोजिटा के नाम है। मेलेरिया डबिया की लकड़ी की ऊनी मांग में विनीर, प्लाईवुड, लुगदी, मैच स्टिक और पैकिंग केस इंडस्ट्री है। इन उद्योगों में उच्च मांग और आपूर्ति का अंतर है। उचित परिधि के प्रत्येक वृक्ष 4000 रुपये तक ला सकते हैं? 6-7 वर्ष की अवधि में 5000 प्रति पेड़ अगर लिबास के रूप में बेच दिया जाता है। हालांकि, इंडस्ट्रीज को मैचस्टिक करने के लिए बेची जाने के 2-3 वर्षों के बाद आय भी उत्पन्न होती है। जाती है: मराठी: कुरिआपुत, गुजराती: कादुकुराज, निम्बारा, अंबरो, लिम्बारो, नीबारा उड़िया: बत्रा कन्नड़: हेब्बिव तेलुगू: मुन्नट्टिकारका तमिल: माली वेम्बू हिन्दी: घोरा-निम, महाणीम इसका व्यापार नाम है, ध्यान दें कि मेलिया डबिया अच्छी तरह से बढ़ता है जहां वर्षा 700 से ऊपर है?
Malabar Neem project report :
Paper industry and cutting will take place on 3 years age plants.
Plant to plant Distance = 8 Feet
Row to row Distance = 6 feet
Total Number of Plants per acre = 907 , cost = 907*50 =45,350 Rs
One Plant cost : 50 Rs
For acre fertilizer cost : 30000 Rs
Market value : 1550 Rs for 1 ton wood
3 years tree weight about 200 kg / tree
Total weight of the plants/ acre  = 907*200 kg =181 tonnes = 181400/1000
Total income from 1 acres plantations sale : 181 tonnes * 1550 =2,80,550 

Thursday, October 26, 2017

ब्रह्मांडीय ग्रीन ब्लॉब व गैस के बुलबुलों से सुपमेसिव ब्लैक होल के बारे में पता चल सकता है!

ब्रह्मांडीय ग्रीन ब्लॉब व गैस के बुलबुलों से सुपमेसिव ब्लैक होल के बारे में पता चल सकता है!

अंतरिक्ष में अधिकांश बॉडी एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं। और एक के व्यवहार और दृष्टिकोण को समझने से ब्रह्मांड के बारे में और ज्ञान हो सकता है। अच्छे उदाहरण ग्रीन ब्रह्मांडीय ब्लॉब हैं। और एक गैस बुलबुला है जो शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों को एक अतिमहत्वपूर्ण ब्लैक होल के इतिहास को समझने में सहायता कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि इस पद्धति में अतिरंजित ब्लैक होल के परिवर्तन और विकास के बारे में अधिक गहराई से जांच करने का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।
2003 में हैनी वैन एरकेल ने ग्रीन ब्लॉब की खोज की। ग्रीन ब्लॉब आकाशगंगा आईसी 24 9 7 की आबादी वाले पृथ्वी से लगभग 200,000 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है। ऑब्जेक्ट पास की ब्लैक होल द्वारा उत्सर्जित विकिरण को अपनी हरे रंग की चमक देता है। विकिरण ऑक्सीजन परमाणु से बाहर निकलता है। जिसके परिणामस्वरूप चमक होती है। हालांकि स्पेस डेली के अनुसार, आईसी 24 9 7 में ब्लैक होल अभी भी मामूली विस्तार कर रहा है और पूरे ब्लॉब हरे रंग को बदलने के लिए शक्तिशाली नहीं है।

हालांकि अभी पर्याप्त रूप से ग्रीन ब्लॉब पास के ब्लैक होल के अतीत की झलक पेश कर सकता है। अगर यह सत्य साबित होता है तो हमें पता चल सकता है कि ब्लैक होल ने एक quasar के रूप में अपना जीवन कैसे शुरू किया। यह ब्रह्मांड में सबसे बड़ा ब्लैक होल है। लेकिन टिप्पणियों के आधार पर हरे रंग के धब्बे एक शांत और धीमी गति से वैज्ञानिक को बढ़ावा देने के लिए कह रहा है कि यह जल्द ही कम उज्ज्वल दिख सकता है।
जानिए ऐसे तारे के बारे में जो ब्लैक होल के है सबसे करीब!
14,800 प्रकाश वर्ष दूर स्थित एक तारा ब्लैक होल के सबसे नजदीक घूमता हुआ दिखाई दिया। सितारे पृथ्वी और चंद्रमा के बीच 2.5 गुना दूरी पर हर 28 मिनट में ब्लैक होल के पास घूमते हैं। इससे पता चलता है कि स्टार तेजी से चलते हैं। इसकी गति 30 मिनट से भी कम समय में 3.7 मिलियन मील तक हो सकती है। पृथ्वी की गति से 100 गुना से अधिक के रूप में यह सूर्य के चारों ओर की कक्षाएं होती है।
शोधकर्ताओं ने Chandra X-ray Observatory, the Australia Telescope Compact Array (ATCA) और नासा के स्पेस टेलिस्कॉप का उपयोग करके इनका अध्ययन किया। इन डेटा से एक्स रे में परिवर्तन को खोजा गया। ब्लैक होल और white dwarf बाइनरी सिस्टम को X9 कहा जाता है।
X9 नामक बाइनरी सिस्टम 47 Tucanae आकाशगंगा के किनारे पर स्थित है। शोधकर्ताओं ने इससे पहले सोच रखा था कि ब्लैक होल इन तारों के समूहों में काफी दुर्लभ या नहीं होते हैं। globular clusters ब्लैक होल्स को समझने के लिए सबसे सही जगहों में से एक हो सकते हैं।
शोधकर्ताओं ने सोचा कि बाइनरी स्टार सिस्टम दो सितारों से बना है।

हालांकि आगे की जांच से पता चला कि दूसरा एक ब्लैक होल हार्वेस्टिंग मटीरियल white dwarf तारे से था। यह white dwarf ब्लैक होल से काफी नजदीक है। जिससे ब्लैक होल द्वारा चीजों को अपनी ओर वहीं से खींचा जा रहा है। ब्लैक होल सितारों को अलग कर देते हैं।

लेकिन एक्स 9 का मामला अलग है क्योंकि शोधकर्ताओं का कहना है कि स्टार औसत समय के लिए सुरक्षित रहेगा।

Wednesday, October 25, 2017

मूंगफली के प्रमुख रोग एवं बचाब

मूंगफली के प्रमुख रोग एवं बचाब



मूंगफली के दानों से 40-45% तेल प्राप्त होता है जो कि प्रोटिन का मुख्य स्त्रोत है। मूंगफली की फल्लियों का प्रयोग वनस्पति तेल एवं खलियों आदि के रुप में भी किया जाता है। मूंगफली का प्रचुर उत्पादन प्राप्त हो इसके लिये पौध रोग प्रबंधन की उचित आवश्यकता महसूस होती है। पौध रोग की पहचान एवं प्रबंधन इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।मूंगफली तिलहनी फसलों के रुप में ली जाने वाली प्रमुख फसल है। मूंगफली की खेती मुख्य रुप से रेतीली एवं कछारी भूमियों में सफलता पूर्वक की जाती है।

मूंगफली के प्रमुख रोग एवं रोग जनक:



क्र.                    रोगरोग                                              जनक

1                    टिक्का या पर्ण चित्ती रोग                         सर्कोस्पोरा अराचिडीकोला/ सर्कोस्पोरा परसोनाटा

       
2                     रस्ट अथवा गेरूआ रोग                                 पक्सिनिया अरॉचिडिस

3                     स्टेम रॉट                                                    एस्क्लेरोसियम रोल्फ्साइ

4                      बड नेक्रोसिस                                                   बड़ नेक्रोसिस वायरस

5                      एनथ्रक्नोज                                                 कोलेटोट्राइकम डिमेटियम/ कोलेटोट्राइकम केपसिकी





1. मूंगफली का पर्ण चित्ती अथवा टिक्का रोग-

भारत में मूंगफली का यह एक मुख्य रोग है और मूंगफली की खेती वाले सभी क्षेत्रों में पाया जाता है। भारत में उगार्इ जाने वाली मूंगफली की समस्त किस्में इस रोग के लिये ग्रहणषील है। फसल पर इस रोग का प्रकोप उस समय होता है जब पौधे एक या दो माह के होते है। इस रोग में पत्तियों के ऊपर बहुत अधिक धब्बे बनने के कारण वह शीघ्र ही पकने के पूर्व गिर जाती है, जिससे पौधों से फलियां बहुत कम और छोटी प्राप्त होती हैं।

 मूंगफली का पर्ण चित्ती अथवा टिक्का रोग

रोग लक्षण:-

रोग के लक्षण पौधे के सभी वायव भागों पर दिखाइ देते है। पत्तियों पर धब्बे सर्कोस्पोरा की दो जातियों सर्कोस्पोरा परसोनेटा एवं स्र्कोस्पोरा एराचिडीकोला द्वारा उत्पन्न होते है। एक समय में दोनो जातियां एक ही पत्ती पर धब्बे बना सकती है। सर्वप्रथम रोग के लक्षण पत्तीयों की उपरी सतह पर हल्के धब्बे के रुप में दिखाइ देते है और पत्ति की निचली बाह्य त्वचा की कोषिकायें समाप्त होने लगती है। सर्कोस्पोरा एराचिडीकोला द्वारा बने धब्बे रुपरेखा में गोलाकार से अनियमित आकार के एवं इनके चारों ओर पीला परिवेष होता है। इन धब्बों की ऊपरी सतह वाले ऊतकक्षयी क्षेत्र लाल भूरे से काले जबकि निचली सतह के क्षेत्र हल्के भूरे रंग के होते है। सर्कोस्पोरा परसोनेटा द्वारा बने धब्बे अपेक्षाकृत छोटे गोलाकार एवं गहरे भूरे से काले रंग के होते है। आरंभ में यह पीले घेरे द्वारा धिरे होते है तथा इन धब्बों की निचली सतह का रंग काला होता है। ये धब्बे पत्ती की निचली सतह पर ही बनते है।

रोग नियंत्रण उपाय:-

मूंगफली की खुदाइ के तुरंत बाद फसल अवषेशों को एकत्र करके जला देना चाहिये।
मूंगफली की फसल के साथ ज्वार या बाजरा की अंतवर्ती फसलें उगाये ताकि रोग के प्रकोप को कम किया जा सके।
बीजों को थायरम ( 1 : 350 ) या कैप्टान ( 1 : 500 ) द्वारा उपचारित करके बोये।
कार्बेन्डाजिम 0.1% या मेनकोजेब 0.2% छिड़काव करें।


2. मूंगफली का गेरुआ रोग:-

मूंगफली का गेरुआ रोग

रोग लक्षण:-

सर्व प्रथम रोग के लक्षण पत्तियों की निचली सतह पर उतकक्षयी स्फोट के रुप में दिखाइ पड़ते है। पत्तियों के प्रभावित भाग की बाह्य त्वचा फट जाती है। ये स्फोट पर्णवृन्त एवं वायवीय भाग पर भी देखे जा सकते है। रोग उग्र होने पर पत्तीयां झुलसकर गिर जाती है। फल्लियों के दाने चपटे व विकृत हो जाते है। इस रोग के कारण मूंगफली की पैदावार में कमी हो जाती है, बीजों में तेल की मात्रा भी घट जाती है।

नियंत्रण:-

फसल की शीघ्र बोआई जून के मध्य पखवाडे में करे ताकि रोग का प्रकोप कम हो।
फसल की कटाई के बाद खेत में पडे रोगी पौधों के अवषेशों को एकत्र करके जला देना चाहिये।
बीज को 0.1% की दर से वीटावेक्स या प्लांटवेक्स दवा से बीजोपचार करके बोये।
खडी फसल में घुलनशील गंघक 0.15% की दर से छिड़काव या गंधक चूर्ण 15 कि.ग्रा. प्रति हे. की दर से भुरकाव या कार्बेन्डाजिम या बाविस्टीन 0.1 प्रतिषत की दर से छिडके।


3. जड़ सड़न रोग:-

जड़ सड़न रोग

रोग लक्षण:-

पौधे पीले पड़ने लगते है मिट्टी की सतह से लगे पौधे के तने का भाग सूखने लगता है। जड़ों के पास मकड़ी के जाले जैसी सफेद रचना दिखाइ पड़ती है। प्रभावित फल्लियों में दाने सिकुडे हुये या पूरी तरह से सड़ जाते है, फल्लियों के छिलके भी सड़ जाते है।

नियंत्रण:-

बीज शोधन करें।
ग्रीष्म कालीन गहरी जुताइ करें।
लम्बी अवधि वाले फसल चक्र अपनायें।
बीज की फफूंदनाषक दवा जैसे थायरम या कार्बेन्डाजिम 3 ग्राम दवा प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से बीजोपचार करें।
4. कली ऊतकक्षय विषाणु रोग:-

कली उतकक्षय विषाणु रोग

रोग लक्षण:-

यह विषाणु जनित रोग है रोग के प्रभाव से मूंगफली के नये पर्णवृन्त पर हरिमा हीनता दिखाइ देने लगती है। उतकक्षयी धब्बे एवं धारियां नये पत्तियों पर बनते है तापमान बढ़ने पर कली उतकक्षयी लक्षण प्रदर्शित करती है पौधों की बढ़वार रुक जाती है। थ्रिप्स इस विषाणुजनित रोग के वाहक का कार्य करते है। ये हवा द्वारा फैलते है।

नियंत्रण:-

फसल की शीघ्र बुवाइ करें।
फसल की रोग प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें।
मूंगफली के साथ अंतवर्ती फसलें जैसे बाजरा 7:1 के अनुपात में फसलें लगाये।
मोनोक्रोटोफॉस 1.6 मि.ली./ली या डाइमेथोएट 2 मि.ली./ली. के हिसाब से छिड़काव करें।
5. श्‍याम व्रण या ऐन्थ्रेक्नोज:-

रोग लक्षण:-

यह रोग मुख्यत: बीज पत्र, तना, पर्णवृन्त, पत्तियों तथा फल्लियों पर होता है। पत्तियों की निचली सतह पर अनियमित आकार के भूरे धब्बे लालिमा लिये हुये दिखाइ देते है, जो कुछ समय बाद गहरे रंग के हो जाते है। पौधों के प्रभावित उतक विवर्णित होकर मर जाते है और फलस्वरुप विशेष विक्षत बन जाते है।

नियंत्रण:-

ग्रीष्मकालीन गहरी जुताइ करें।
प्रमाणित एवं स्वस्थ बीजों का चुनाव करें।
संक्रमित पौधों के अवषेशों को उखाड़ कर फेक दे।
बीजों को कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या मेनकोजेब (0.31)% या कार्बेनडॉजिम (0.7) % द्वारा बीजोपचार करें।
organic farming:
मूंगफली
जैविक खेती:
दलहन
फ़सल

Tuesday, October 24, 2017

World's deadliest countries for air pollution

The Guardian (WHO data): “World's deadliest countries for air pollution."

List Notes: Data is the top 5 deadliest countries for air pollution annually from PM2.5 and PM10 pollution. Per capita data is per 100,000 persons.
China tops WHO list for deadly outdoor air pollution
More than 1 million people died from dirty air in one year, according to World Health Organisation
 Children in face masks
 Students wearing face masks walk across the street in a line in Jinan, in east China’s Shandong province. Photograph: AFP/Getty Images
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Adam Vaughan
@adamvaughan_uk
Tuesday 27 September 2016 07.00 BST Last modified on Wednesday 20 September 2017 19.18 BST
China is the world’s deadliest country for outdoor air pollution, according to analysis by the World Health Organisation (WHO).

The UN agency has previously warned that tiny particulates from cars, power plants and other sources are killing 3 million people worldwide each year.

For the first time the WHO has broken down that figure to a country-by-country level. It reveals that of the worst three nations, more than 1 million people died from dirty air in China in 2012, at least 600,000 in India and more than 140,000 in Russia.

At 25th out of 184 countries with data, the UK ranks worse than France, with 16,355 deaths in 2012 versus 10,954, but not as poorly as Germany at 26,160, which has more industry and 16 million more people. Australia had 94 deaths and 38,043 died in the US that year from particulate pollution.

Maria Neria, director of the WHO’s public health and the environment department, told the Guardian: “Countries are confronted with the reality of better data. Now we have the figures of how many citizens are dying from air pollution. What we are learning is, this is very bad. Now there are no excuses for not taking action.”

Gavin Shaddick, who led the international team that put together the data, said: “Globally, air pollution presents a major risk to public health and a substantial number of lives could be saved if levels of air pollution were reduced.”

Sunday, October 22, 2017

Cultivation of Reishi Mushroom (Ganoderma lucidum)

Cap formation and growth
is filled in polypropylene bags the mouth of
which is then plugged with cotton after putting
a plastic ring exactly like wheat grain spawn
pack of mushrooms in polybags.
The bags are then sterilized in autoclave
at 22 p.s.i. for 2 hrs. After cooling, the substrate
is spawned with wheat grain or saw dust
spawn @ 3% on the dry weight basis, as it is
comparatively a slow growing fungus. Spawnrun
(incubation) is done at 28-35 °C in the
closed rooms (high carbon dioxide) and
darkness. After the complete spawn run (bags
white all over), which takes about 25 days,
polythene top is cut at the level of the substrate
totally exposing the top side and proper
conditions for fruiting or pinning (temp. 28 °C,
1500 ppm CO2, 800 lux light, 95% RH) are
provided.
Once the pins have grown up enough to
form the cap which is indicated by the
flattenning of the whitish top of the pinhead,
humidity is reduced to 80% RH and more fresh
air is introduced (1000 ppm CO2). Once the cap
is fully formed, which is indicated by yellowing
Mature spore shedding Reishi
of the cap margin (which is otherwise white),
temperature is lowered to 25 °C and RH is
further reduced to 60% for cap thickening,
reddening and maturation of the fruitbodies.
Full maturity is indicated, when the cap is
fully reddish brown and spores are shed on the
top of the cap (see the photograph). Harvesting
is done by the tight plucking, holding the root
with one hand and pulling up with another;
scissors and knives can also be used but no
residual bud is left after harvesting. One cycle
of the growing takes 10-15 days. After
harvesting the first flush, conditions for
pinning are again switched on (i.e. 28 °C,
95%RH, 1500 ppm CO2, 800 lux light) for
staring and completing the second flush.
Depending upon the conditions, 2-3 flushes
appear and a total 25% B.E. can be achieved
(250 g fresh mushroom from one kg dry
substrate). One crop takes about four months.
Harvested mushrooms, after washing with
water, are dried at low temperature (<50 °C)
in the cabinet driers, preferably at 35 °C in
the dehumidifying cabinet drier. Freeze drying
is, however, the best. Reishi mushroom has
very high dry matter (45% i.e. 450 g dry from
1 kg fresh).
MARKETING
Reishi is used as medicine and not as food
because it is bitter and corky hard. Any one
growing it has to find the market which is
basically herbal medicine and food supplement
(nutraceuticals) sector. Manufacturers of
herbal medicines and food supplements can
process, pack and trade it in various formscapsules,
tablets, liquid extracts or even Reishi
Printed at: Yugantar Prakashan Pvt. Ltd., New Delhi.
Sawdust +
Wheat bran
Sawdust or
Wheat grain
Substrate
Spawn
Wetting
(65%)
Pasteurization
22 p.s.i for 2hrs
Spawning
@ 3% dry wt. basis
Incubation
(28-32°C, high CO2, dark)
Pinning
(28-32°C, RH 95%, 1500ppm CO2, light>800 lux)
Cap formation and growth
(28°C, RH 80%, 1000ppm CO2 )
Maturation
(25°C, RH 60%)
Harvesting
Drying (<45°C)
Packing (N2 flushed)

Tuesday, October 17, 2017

आत्मविश्वास – Self Confidence बढ़ाने के 10 आसान तरीके

आत्मविश्वास – Self Confidence बढ़ाने के 10 आसान तरीके !



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कैसे बढ़ाये अपना self confidence ? – Self Confidence Kaise Badhaye


इंटरव्यू के समय या किसी मंच पर बोलते समय कई लोगो के हाथ-पैर इसलिए फूल जाते हैं क्योंकि उनको खुद पर विश्वास नहीं होता. आपके पास चाहे कितनी भी नॉलेज क्यों न हो पर यदि आप confidence नहीं है तो आपका ज्ञान आपके लिए कुछ भी नहीं.

कई बार आपके सामने अपनी काबिलियत साबित करने मौका आता है और उस वक्त पर आपका आत्मविश्वास अगर हिल गया तो आपको पीछे हटना पड़ता है.आत्मविश्वास की कमी के कारण हमारा व्यक्तित्व पर नकारात्मक असर पड़ता है.
कई बार आत्मविश्वास की कमी के कारण आने वाली कई बड़ी संभावनाएं हमसे छूट जाती हैं.

How to Increase Self Confidence 10 Tips In Hindi – आत्मविश्वास बढ़ाने के 10 आसान उपाय



www.nayichetana.com
Self-confidence आत्मविश्वास







अगर आप अपने आसपास या किसी भी मौके पर किसी सफल आदमी को देखते है तो आपने यह जरुर note किया होगा की उस आदमी में आपको पूरा confidence दिख जायेगा. जो भी व्यक्ति अपने जीवन में बड़े मुकाम पर पहुंचता है या सफल होता है वह हमेशा aatmvishvas से लबरेज होता है. कई एक्टर और एक्ट्रेस, राजनेता, महान क्रिकेटर, या कोई बिजनेसमैन सभी में आत्मविश्वास का गुण कूट-कूट कर भरा होता है.


कोई व्यक्ति अगर शारीरिक व मानसिक रूप से अस्वस्थ होते हुये भी अगर सफलता प्राप्त करता है तो इसका Main Reason उस व्यक्ति का आत्मविश्वास होता है. Self confidence के कारण ही अब्राहम लिंकन कई बार चुनाव हारने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति बने उनकी यह सफलता confidence के कारण ही थी. ऐसे ही आप अगर अपने आसपास देखेंगे तो कई exmple आपको भी मिल जायेंगे.

सफल व्यक्ति को खुद पर पूर्ण रूप से विश्वास होता है जिस कारण वह सफलता जरूर प्राप्त करता है. किसी व्यक्ति में कॉन्फिडेंस कम या ज्यादा हो सकता है परन्तु आपको खुद में Self confidence बढ़ाने की पूरी कोशिश करनी चाहिए.



अपने आत्मविश्वास को मजबूत रखने और व्यक्तित्व को प्रभावशाली बनाने के लिए अगर आप अपनी सोच में ये बदलाव लाएंगे तो यकीनन सफलता आपके कदम चूमेगी.

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आत्मविश्वास बढ़ाने के 10 Tips:/ Aatamvishvas Badhane ke 10 Tips





* सफल लोगो की तरह खुद को ढालें:

आपको अपने जीवन में कई ऐसे लोग जरुर मिले होंगे जिनको देखकर आपको लगा होगा की यह व्यक्ति पूरी तरह aatmvishvas से भरा हुआ है. उन लोगो की उन खास बातो को नोट जरुर करा होगा जो उनका कॉन्फिडेंस बढाती है. जैसे- चलने और बैठने के ढंग पर ध्यान दे, जो बोलना है उसे दबी आवाज में मत बोले और बाते करते वक्त नजरे मिलाये आदि .

जब मैं अपने स्कूल में पढता था तो अपने से बेहतर स्टूडेंट को फॉलो करता था और उसी की तरह कई चीजे करने का प्रयास करता था. for example- class में first सीट पर बैठना, अध्यापक के पूछने पर सबसे पहले आंसर देना और साथी सहपाठियों को नयी-नयी जानकारियां देना आदि. इन चीजो से मुझे बहुत confidence मिलता था.



* बीते समय में मिले अपने achievements को याद करे:

आपको अपने past में कई अचीवमेंट्स मिले होंगे. उदाहरण- आप अपने class में कभी first आये होंगे, किसी विषय में स्कूल में सबसे ज्यादा मार्क्स होंगे, किसी कॉम्पटीसन में में बेस्ट किया होगा या किसी sports में ख़िताब जीता होगा. आपका खुद पर विश्वास जब कम होता है तो उस समय आप अपने पिछले प्राप्त किये हुए achivments को याद करे यह आपका self-confidence जरुर improve करेगा.



* यह महसूस करे की आप confident हैं:

कई बार हम सिर्फ इसलिए low confidence feel करते है क्योंकि हमें लगता है की मेरे अन्दर आत्मविश्वास नहीं है जो हमारा confidence और गिरा देता है तो आप किसी भी वक्त पर बिलकुल Negative न सोचे बल्कि यह सोचे की आप पूरी तरह से full-confidence है. आप अपने mind में यह imazine कर सकते है की आपकी सभी लोग तारीफ कर रहे है. वो आपकी ओर आकर्षित हो रहे है.ऐसा सोचना आपको बहुत benifit देगा.





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* गलतियाँ होने पर घबराये मत:

अगर कोई व्यक्ति आपसे यह कहे की उसने अपने जीवन में कभी कोई गलती नहीं की तो आप यह समझ ले की वह व्यक्ति आपसे कोरा झूठ बोल रहा है. गलती तो इंसान ही करता है.जब वह गलती करता है तभी उस गलती से सीखता है और अगली बार वह उस काम को बेहतर ढंग से करता है.

सबसे बड़ी गलती हम तब करते है जब हम कोई भी काम सिर्फ इस सोच के कारण नहीं करते कि मुझसे यह काम नहीं होगा या मुझसे कोई गलती हो जाएगी और इस सोच के कारण हम प्रयास ही नहीं करते जो हमारे लिए बहुत नुकसानदायक होता है. इसलिए गलती होने के डर से या असफल होने के डर से आप अपने बेहतरीन मौको को न गवाएं. बल्कि प्रयास करे यह आपको नयी सीख देगा.



* खुद को किसी चीज में और लोगो से बेहतर बनाये:

आज के दौर में हर आदमी औरो से कुछ अलग करना चाहता है. भगवान ने हमें कुछ ऐसा Special telent दिया है जो हमें और लोगो से अलग करता है बस जरुरत है तो उसे खोजने की. कोई भी आदमी हर फील्ड में एक्सपर्ट नहीं बन सकता लेकिन वह अपने हॉबी और interest के कुछ चीजो में expert जरुर बन सकता.

मैं जब अपने स्कूल में पढता था तो मेरे कई दोस्त singing, dancing, sports, cricket में मुझसे बेहतर थे लेकिन मैं स्कूल में पढाई में अच्छा था जो मुझे उनसे अलग बनाता था. वही आज मैं www.nayichetana.com ब्लॉग बना कर लोगो को अपने आर्टिकल, अपने विचारो व अनुभवों के द्वारा जब उनकी हेल्प करता हूँ तो यह मुझे confidence देता है.

इसलिए दोस्तों आप भी खुद के interest का कुछ ऐसा काम करिए या ऐसी हॉबी जैसे क्रिकेट, फूटबाल, डांस, म्यूजिक आदि creat करिए जो आपको आपके एरिया में सबसे अलग बनाये. अगर आप अपने ऑफिस में काम करते है तो वहां औरो से बेहतर बने, अगर स्टूडेंट हो तो अपने school or college में बेहतर बने. अगर आप किसी चीज में better होंगे तो यह आपका confidence level बहुत ही high कर देगा.



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* जरुरतमंदो की सहायता करे:



आप अपने जीवन में उन लोगो के लिए कुछ अच्छा करे जो बदले में आपको कुछ नहीं दे सकते. अगर आप दुसरे लोगो की मदद करते है तो इससे आपका आत्मविश्वास बढेगा. अपने आस-पड़ोस में लोगो की हेल्प करके और किसी गरीब आदमी को कुछ सहारा देकर और शारारिक रूप से अक्षम लोगो की मदद करके आपको जो ख़ुशी मिलेगी वह कही और आपको नहीं मिल सकती और यह आपके अन्दर एक self-respect भी पैदा करेगा.



* अपनी dressing में सुधार करे:



आप किसी भी तरह के प्रोग्राम,पार्टी,शादी या किसी मीटिंग में अगर जाते हो तो अपने ड्रेस का ध्यान जरुर रखे. जब भी कपड़े खरीदने जाये तो ऐसे कपड़े ख़रीदे जो आपको confidence दे. आप कभी भी यह नोट जरुर करना की जब आप अच्छे तरह से तैयार होते है और आपका dressing जब अच्छा रहता है तो आप तब खुद को आत्मविश्वास से भरा हुआ पाएंगे क्योंकि इससे हमको लोगो का सामना करने का आत्मविश्वास मिल जाता है.



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* जिस चीज से आपका confidence घटता है उसे करते रहे:

कई लोगो ऐसे होते है जो किसी खास कारण से अपना आत्मविश्वास low करते है.किसी को प्रेजेंटेशन के वक्त डर लगता है तो कोई स्टेज पर आने से डरता है. कई लोग तो ऐसे होते है जिनका दिल तो चाहता है की वह यह काम करे लेकिन सिर्फ डर और लोग क्या कहेंगे के कारण उस काम को करने से डरते है. अगर मैं अपनी बात करूँ तो जब मैंने n.g.o. में पहली बार काम करा तब मुझे मीटिंग में अपने साथियो के साथ बात करने में घबराहट होती थी जिस कारण मैं अपनी बात को सही ढंग से नहीं रख पाता था. जो मेरे confidence को पूरा low कर देता था.

लेकिन धीरे-धीरे मैंने कोशिश करी और इसमें सफलता पाई और आज न कोई घबराहट है न confidence low होता है. इसलिए आप भी उस चीज को बार-बार करिए जो आपके आत्मविश्वास को कम करता है.



* दूसरो से अपनी तुलना न करे:

अगर आपका confidence low होता है तो इसका main reason आपका अपनी तुलना दूसरो से करना है. अगर आप देखेंगे तो यह पाएंगे की आप हमेशा उन लोगो की तरह बनना चाहते है जो आपकी नजर में आपसे बेहतर या सफल है. यह आपके लिए आत्मविश्वास के लिए बहुत बड़ी बात होती है जो आपके आत्मविश्वास को बिलकुल जीरो कर देता है. आपको यह ध्यान रखना चाहिए की हर व्यक्ति की situatian और हालात अलग-अलग होते है.

क्या पता उस आदमी को आपसे बेहतर हालात और मौके मिले हो जिस कारण वह सफल हुआ हो. इसलिए किसी भी व्यक्ति को कामयाब देखकर खुद से तुलना न करे बल्कि अपनी प्रतिभा और ताकत को अपना औजार बनाये. अपने लक्ष्य तय करे और उसे हासिल करने की सोचे.



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* अपना कार्य समय पर पूरा करे:



आप अपने दिनभर के कार्यो का टाइम टेबल बना ले.आपने एक दिन में क्या-क्या करना है वह पहले ही सोच ले और उसके बाद सुबह से ही अपने कार्यो को पूरा करने के लिए जुट जाए. अगर आप अपने works को निश्चित समय के अन्दर पूरा करते है तो यह आपके आत्मविश्वास को बहुत ही बढ़ा देगा.



दोस्तों ! हमारी ज़िन्दगी का जो समय है वह दिन-प्रतिदिन कम होता रहेगा. कब हम युवा से बुड्ढे हो जाये समय के साथ पता ही नहीं चलेगा. अपने low-confidence के कारण life में घबराओ मत.जीवन में सफलता के लिए confidence बहुत ही आवश्यक है. बिना confidence के शायद ही कोई व्यक्ति सफल हो पाए. अगर आप प्रैक्टिस करोगे तो आप अपना confidence आसानी से boost कर सकते है.

इसके लिए जरुरत है तो बस अभ्यास की. आप इस बात को जान लिजिये की आपका confidence आपके looks,आपके घर के हालात, समाज की दशा, आपकी शिक्षा या पैसो पर depend नहीं करता बल्कि यह तो आपके अन्दर से आता है. अगर आप self-confident है तो बिना आपके permission के कोई भी बाहरी तत्व आपको low-confidence feel नहीं करा सकता.

इसलिए अपना confidence को बढ़ाये और बढ़ा ले कदम सफलता की ओर.

New Year Hindi Essay नववर्ष

New Year Hindi Essay नववर्ष

New Year Essayनव वर्ष एक उत्सव की तरह पूरे विश्व में अलग अलग स्थानों पर अलग अलग विधियों से मनाया जाता है । विभिन्न सम्प्रदायों के नववर्ष भिन्न होते हैं और इसके महत्व की भी विभिन्न संस्कृतियों में परस्पर भिन्नता है । ज्य़ादातर देशों मैं नववर्ष 31 दिसम्बर को 12 बजे के बाद 1 जनवरी को मनाते है I

भारत में भी नववर्ष 1 जनवरी को मनाया जाता है पर हिन्दू शास्त्रों के अनुसार नववर्ष मार्च अप्रैल के बीच में पड़ता है I 1 जनवरी का नववर्ष अंग्रेज़ी कैलेण्डर के अनुसार मनाया जाता है I हर धर्म के अपने अपने कैलेंडर हैं पर ज्यादातर देश अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार ही नववर्ष मनाते हैं I

चीनी फरवरी में नववर्ष मनाते हैं I भारत में भी नववर्ष अलग अलग तिथियों को मनाया जाता है I 31 दिसम्बर को 12 बजे के बाद लोग आतिशबाजियां करते हैं और एक दूसरे को बधाइयाँ देते हैं I लोग इस दिन बहुत खुशियां मनाते है I
10 Best New Year Resolution जो बढ़ायेंगे आपका Self Improvement !




नये साल पर 10 आसान संकल्प जो आपकी Life बनायेंगे बेहतर ! 10 Best New Year’s Resolutions in Hindi


Friends ! साल 2016 अब अपने आखिरी पड़ाव पर है सभी लोग इसे अलविदा कहने के लिए तैयार है. कई लोगो ने तो नये साल के लिए बहुत सारे Resolution (संकल्प) बना लिए होंगे. पर क्या वाकई हम उन New Year Resolution को पूरा कर पाते है. खैर, अच्छी बात है.. आपने जो भी संकल्प लिया हो उसे पूरा करने का प्रयास करे और उसमे सफल रहे.

आज नयीचेतना पर हम भी आपके साथ इस पोस्ट में 10 New Year Resolution शेयर कर रहे है. जो हमारे Self – Improvment के लिए बहुत जरुरी है. नव वर्ष हमारी लाइफ की एक नयी शुरुआत होती है. नए साल से हम जो भी चाहे अपनी लाइफ में बदलाव कर सकते है.

अपनी Bad Habits (बुरी आदतों) को छोड़ सकते है. New Good Habit (अच्छी आदत) Start कर सकते है. अपनी life के लिए Most Importants Goal निर्धारित कर सकते है और आने वाले साल को एक Succesfull Year बना सकते है.



10 Best New Year's Resolutions in Hindi नये वर्ष पर संकल्प
            My New Year Resolutions
Best 10 New Year Resolution In Hindi



अपनी कोई बुरी आदत त्याग दे –

जिस तरह हर आदमी में कोई न कोई अच्छाई होती है. उसी तरह हर व्यक्ति में कई bad habits होती है. कई बुरी आदते हमारी समय के साथ छुट जाती है तो वही कुछ नयी बुरी आदते वक्त के साथ हमारे साथ जुड़ जाती है. इस नये साल पर अब यह संकल्प ले की इस नव वर्ष आप अपनी कोई बहुत बुरी आदत को छोड़ दोगे.

बुरी आदत वह हो जो आपको आगे बढ़ने से रोकती है.. आपको कमजोर बनाती है और जो आपकी लाइफ के लिए एक बहुत बड़ा रोड़ा हो. हम हर साल के आखिर में यह सोचते है की हम अपनी बुरी आदत को छोड़ देंगे पर छोड़ नहीं पाते. अगर इस बार भी ऐसा ही करा तो आगे भी इस आदत से परेशान ही रहोगे.

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हफ्ते में कम से कम 5 दिन Exercise करे –

एक Human Body के लिए जिस तरह भोजन जरुरी है ठीक उसी तरह से Exercise भी जरुरी है. हम लोग खाना खाने में तो बिलकुल भी कमी नहीं करते But एक्सरसाइज के मामले में सबसे बड़े कंजूस होते है. हमें यह पता होता है की एक्सरसाइज करना हमारी सेहत के लिए Better होता है but हम इसे कभी Priority नहीं देते और हमेशा इसे टालते रहते है. पर आखिर कब तक.. आखिर कब तक आप इसे टालते रहोगे.

एक न एक दिन आपको अपनी हेल्थ के लिए कोई बड़ा Decision लेना ही पड़ेगा. वरना आपकी अच्छी खासी सेहत भी एक दिन खत्म हो जाएगी. इसलिए इस नये साल पर संकल्प ले की हर हफ्ते कम से कम 5 दिन एक्सरसाइज जरुर करोगे. आप भले ही थोड़ा – थोड़ा करके इसे Start करे पर Start जरुर करे.

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किसी की बुराई करने से बचे –

इस दुनिया में 100 में से 80 लोग ऐसे होते है जो हमेशा दूसरो की बुराई करने में लगे रहते है. ऐसे लोग खुद की Value तो कम करते ही है साथ में Negativity को भी Attract करते है. खुद के अंदर देखो की कही आप भी हर समय दूसरो की बुराई करने में तो नहीं लगे रहते.

अगर आप ऐसे नहीं है तो बधाई के पात्र है but अगर आपके अंदर यह बुराई करने की Habit है तो इससे बचे. यह हमारी Personality के लिए अच्छी नहीं होती. यह हमें दूसरो के सामने कमजोर बनाती है.

अगर हो सके तो दूसरो लोगो के अच्छी बातो को दूसरो तक शेयर करे. उनकी तारीफ करे but लोगो की बुराई करने से बचे. बुराई करके आप किसी को Change नहीं कर सकते. इस नए साल पर आप अपनी हैबिट को बदले और अच्छाई की ओर कदम बढ़ाये.

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अपने गुस्से पर Control करे –

गुस्सा जितना दूसरो के लिए घातक होता है उससे ज्यादा यह खुद के लिए घातक है. गुस्से में व्यक्ति कभी भी अच्छा नहीं करता. यह अच्छी फीलिंग नहीं होती. क्रोध में व्यक्ति हमेशा नुकसान ही करता है. वह चाहे अपना हो या दूसरो का. इस बात को समझिये की गुस्सा हमारे लिए कितना danger है. इससे अच्छे खासे रिश्ते टूटने में एक मिनट का भी Time नहीं लगता.

हम गुस्से में कई बार ऐसे फैसले ले लेते है जो हमें ज़िन्दगी भर पछतावे में डाल देते है. तो क्यों न इस नए साल पर इस Feeling को Quit कर ले. जब भी गुस्सा आये तो उस समय खुद को Cool रखिये और जिस व्यक्ति पर गुस्सा आये उसके सामने से हट जाइये. धीरे – धीरे आपको इसकी Practics हो जाएगी.

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फ़ालतू के कामो में अपना Time Waste करने से बचे –

Time Is Money ! पर अब यह Quotes सुनने में ही ज्यादा अच्छा लगता है. अधिकतर लोग तो Time Waste करने में ज्यादा interst रखते है. कोई अपना Time दोस्तों के साथ बिताने में लगा होता है तो कोई गप्पे मारने में समय बर्बाद करता है. बहुत कम लोग होते है जो इस Time की वैल्यू को जानते है. समय बहुत Importants है.

इसकी कीमत इतनी ज्यादा है की आपको यह राजा बना सकती है तो रंक भी बना सकती है. हर आदमी को एक दिन में 24 hours मिलते है पर सभी लोग इसका सही फायदा नहीं उठा पाते. एक बुद्धिमान व्यक्ति अपने समय का use करके करोडपति बन जाता है तो वही एक गप्पेमार दिनभर गप्प ही मारता रहता है. इसलिए अपना टाइम वेस्ट करने से बचे.

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डेली कम से कम 7 घंटे की नींद ले –

काम तो रोज चलता रहेगा. आप अभी जवान हो बाद में बूढ़े हो जाओगे. पर यह काम कभी नहीं रुकेगा. इसलिए खुद को इतना भी busy मत कर लो की नींद भी अच्छी न लो. काम करना जरुरी है पर उसके साथ में अच्छी नींद भी.

नींद अच्छी नहीं होगी तो Health का अच्छा होना नामुमकिन है. इस नए वर्ष में खुद को बदलो और रोज 7 घंटे की नींद जरुर लो. ये डेली 7 घंटे की नींद आपको बेहतर हेल्थ देगी. आपको फिट रखेगी. एक फिट शरीर जो आपके Succes के लिए बहुत important है.

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कोई Books रोजाना जरुर पढ़े –

मेरा हमेशा ऐसा मानना है की एक सफल और अच्छे इंसान बनने के लिए हमारा Knowledge लेना बहुत जरुरी है. यह नॉलेज हमें मिलती है बुक्स से. मैं उन books की बात नहीं कर रहा जो स्कूल / कॉलेज की किताबें होती है. बल्कि मैं वो books की बात कर रहा जिनसे हमें मोटिवेशन मिलता है. किसी महान व्यक्ति की जीवनी, किसी बिसनेसमेन की Succes Story और किसी फील्ड से Related Information.

जिन लोगों को पढ़ने का शौक होता है उनको छोड़कर बाकी सभी लोग समय की कमी का बहाना बताकर किताबो से दूर ही रहते है. पढना हमेशा हमें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है. पढने से हमें वह जानकारी मिलती है जो किसी फील्ड के लिए जरुरी होती है.

मेरा यकीन मानिये अगर आप कोई books पढ़ते हो तो आपकी सोच बदल जाएगी और जिस इन्सान की सोच बदल गयी. वह इंसान कुछ भी कर सकता है. मैं Recommened करूँगा की आप (जीत आपकी और रहस्य) जैसी किताबें अवश्य पढ़े.

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एक दिन में 2 घंटे से ज्यादा Facebook न चलाये –

जिस तरह से आज फेसबुक का बच्चे से लेकर बूढों तक में क्रेज बढ़ रहा है इसमें हमें कई फेसबुकियाँ मरीज भी देखने को मिलते है. जो 24 घंटे फेसबुक से चिपके रहते है. उनको न खुद की फ़िक्र है और न ही दूसरो की. आज कई स्कूल के Students फेसबुक पर Online रहते है और अपनी पढाई की ओर ध्यान नहीं दे पाते. और फ़ालतू में अपने कई घंटे बर्बाद कर देते है.

सोशल साइट्स पर अपने Family और Friends के साथ Connect रहना तो ठीक है But Social Sites का गुलाम बन जाना बिलकुल सही नहीं. हमें पहले अपने काम पर, अपनी पढाई पर और अपनी लाइफ पर फोकस करना चाहिए. उसके बाद फेसबुक आदि पर ऑनलाइन रहना चाहिए.

अगर आप अभी नहीं जागे तो एक दिन फेसबुक चलाने का यह मजा एक बहुत बड़ी लत में बदल सकता है. इस नये साल पर अपनी यह आदत बदले और डेली 2 घंटे से ज्यादा Fb न चलाये.

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अपना काम को हमेशा खुद करें :

अगर आपको लाइफ में दुःख से दूर रहना है तो आपको अपना काम खुद करना आना चाहिये. खुद पर अगर आप depend रहोगे तो कभी भी मुश्किलें आपको घेर नहीं सकती. जीवन में कई बार ऐसी Condition हमारे सामने आ जाती है जब हम मुश्किल में घिर जाते है तब हमें खुद पर depend रहने की आदत उन मुश्किलों से बाहर निकल देती है.

इसके अलावा दूसरो पर depend रहने पर हमेशा दुःख ही मिलता है. खुद को अगर पूरी तरह से आजाद रखना है तो अपने काम को खुद ही करना सीखे. खुद का काम करने पर Self Respect तो बढती ही है साथ में खुद की मजबूती का भी अहसास होता है. एक Self – Depend व्यक्ति उन लोगो से अधिक मजबूत होता है जो दूसरो के भरोसे बैठे रहते है. इस नव वर्ष पर यह संकल्प जरुर ले की आप अपने काम खुद ही करेंगे.

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खुद के लिए भी समय निकालें –

आज की भागादौड़ी भरी जिंदगी में हम खुद के लिए थोड़ा सा भी समय नहीं निकाल पाते. हम हमेशा खुद को काम में busy रखते है. लगातार काम करने से काम का तनाव हम पर हावी हो जाता है. इससे हमारी ज़िन्दगी कटती है हम ज़िन्दगी का लुत्फ़ नहीं उठा पाते.

खुद के बारे में सोचना.. खुद को वक़्त देना हमें अन्दर से मजबूत और ख़ुशी देता है. अपने लिए समय निकालने पर हमारे मन को शांति मिलती है और हम अपनी किसी बड़े मुसीबत का Solution भी आराम से बैठकर सोच सकते है.

हर दिन अपने लिए कुछ समय जरुर निकाले और उस समय खुद से बातें कीजिये. यह आदत आप अपनाओगे तो आप देखोगे की आपकी लाइफ में एक बड़ा बदलाव आएगा. और खुद को आप बहुत ही आत्मविश्वासी, मजबूत और खुशहाल महसूस करोगे.

दोस्तों ! इस आर्टिकल में बताये गये Tips And New Year Resolution 2017 को अब अपनी लाइफ में फॉलो करना शुरू कर दे और अपने आने वाले साल को एक Succesfull और यादगार साल बनाये.

All The Best !

Monday, October 16, 2017

Hurricane Ophelia: Warnings as storm heads to UK

Hurricane Ophelia: Warnings as storm heads to UK

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Media captionWinds of up to 80mph are expected to hit the UK
The Met Office has warned of "potential danger to life" as the remnants of Hurricane Ophelia head for the British Isles with 80mph (130km/h) winds.
An amber warning for Northern Ireland, west Wales, south west Scotland and the Isle of Man is in force from midday.
In the Republic of Ireland, Met Eireann has issued a red wind warning and the government has deployed the army.
The BBC's Ireland correspondent, Chris Page, said it would be the most severe storm to hit Ireland in half a century.
Met Eireann has recorded gusts of 92mph (148km/h) at Fastnet Rock, off the south coast of Ireland.
Ophelia is on its way from the Azores in the Atlantic Ocean and it comes 30 years after the UK's Great Storm of 1987.
Are you affected by Hurricane Ophelia? E-mail your stories and pictures to haveyoursay@bbc.co.uk or WhatsApp: +447555 173285
The Met Office said there was a "good chance" Northern Ireland could be hit on Monday afternoon by power cuts, flying debris, large waves in coastal areas and disruption to all travel services.
A yellow warning of "very windy weather" also covers parts of Scotland, the west and north of England and Wales.
Hurricane Ophelia: Latest updates
All Northern Ireland schools to close after storm warning
Amber warning for Scotland
Great Storm of 1987: The day 18 people were killed
Met Eireann meteorologist Joanna Donnelly told BBC Breakfast that "hurricane-force winds" were expected and the "real impact" for the Republic of Ireland will be about midday.

Wi-Fi Protected Access‬‬

Wi-Fi Protected Access‬‬
Wi-Fi認証のWPA2に複数の脆弱性? 研究者が公表を予告




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磨き抜かれた従来の技術と最新のAI技術の融合で実現するセキュリティ強化
世界4カ国の担当者が集合。なぜSPARC M12が選ばれるのか?その理由に迫る
日本のビッグデータ活用を新ステージへ!混成チームが徹底解説
そのハードウェアまだ使えます。IT機器の“寿命”を延ばすには?

Print mail download clip Enhanced security realized by blending the polished and conventional technology with the latest AI technology Representatives from 4 countries in the world gather. Why SPARC M12 is chosen? It approaches the reason Use big data in Japan to a new stage! Mixed team thoroughly comment I can still use that hardware. How to extend the "life span" of IT equipment?
ロンドンで12月上旬に開催されるセキュリティカンファレンス「Black Hat Europe 2017」の講演予告に、Wi-Fi認証の「Wi-Fi Protected Access II」(WPA2)に関する脆弱性情報が記載され、
Vulnerability information on Wi-Fi certified "Wi-Fi Protected Access II" (WPA 2) is stated in a lecture notice of security conference "Black Hat Europe 2017" to be held in early December in London,
セキュリティ研究者の間で波紋が広がっている。

 この発表は、ベルギーのルーヴェン・カトリック大学でネットワークやワイヤレスのセキュリティを研究するMathy Vanhoef氏が予定している。予告によれば、WPA2プロトコルの鍵管理に関する複
Ripples spread among security researchers.

This announcement is scheduled by Mathy Vanhoef, who studies network and wireless security at Leuven Catholic University in Belgium. According to the announcement, the key management concerning the WPA 2 protocol
 数の脆弱性が見つかり、「key reinstallation」と呼ばれる攻撃によって悪用可能だという。

 脆弱性はプロトコルレベルの問題とされ、WPA2の標準を正しく実装している環境において攻撃の影響を受けやすいとされる。研究者らが検証したところ、一部のアクセスポイントやクライアントに脆弱性が認められたが、機器の実装状況などに応じて攻撃手法や影響は異なる可能性があるとしている。
A number of vulnerabilities are found and are said to be exploitable by attacks called "key reinstallation".

The vulnerability is regarded as a protocol level problem and it is said to be vulnerable to attacks in an environment that correctly implements the WPA 2 standard. Researchers have verified that vulnerabilities were found in some access points and clients, but attack methods and influences may be different depending on the implementation status of the equipment.
この予告の直後からインターネット上ではさまざまな憶測が飛び交う。WPA2は、現在普及しているWi-Fiサービスではセキュリティレベルが高いとされていることから、脆弱性の発覚によって多数のユーザーに危険が及ぶと懸念する意見が目立つ。既に共通脆弱性識別子(CVE)が割り当てられ、「一部のネットワーク機器メーカーがファームウェアのアップデートで対処したようだ」といったうわさも散見される。

 Vanhoef氏は10月16日のツイートで、「これほどの反響を予期していなかった」とコメントし、情報公開が解禁されれば問い合わせに応じると説明。脆弱性情報は16日中(日本時間16日夜から17日未明頃か)に公表される見通しだという。

 無線通信機器のセキュリティ問題では、9月上旬にBluetoothに関する脆弱性(通称「BlueBorne」)が報告され、世界的な話題になった。
Immediately after this notice various speculations flutter on the Internet. Since WPA 2 is considered to have a high security level for the currently popular Wi-Fi service, there are remarkable opinions concerning the dangers of many users due to the vulnerability detection. A common vulnerability identifier (CVE) has already been allocated and there are rumors of rumors that "some network equipment makers seem to have coped with firmware updates".

Mr. Vanhoef said in a tweet on 16th October, "I did not anticipate such an echo", he explained that he will respond to inquiries if information disclosure is lifted. The vulnerability information is expected to be released during the 16th (Japan night time 16th night to around early 17th day).

In the security problem of wireless communication equipment, the vulnerability on Bluetooth (so-called "BlueBorne") was reported in early September and it became a global topic.

Sunday, October 15, 2017

लहसुन की उन्नत खेती



लहसुन की उन्नत खेती

लहसुन एक महत्त्वपूर्ण व पौष्टिक कंदीय सब्जी है।हसुन दूसरी कंदीय सब्जियों के मुकाबले अधिक पौष्टिक गुणों वाली सब्जी है। लहसुन की  खेती पूरे भारतवर्ष में नकदी फसल के रूप में की जाती है. यह मसाला फसलों में गिना जाता है. इसका उपयोग आचार,चटनी,मसाले तथा लगभग हर सब्जी में किया जाता है. इसकी खेती तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश के , गुजरात  एवं मध्य प्रदेश में बड़े पैमाने में की जाती है. इसके निर्यात से विदेशी मुद्रा भी मिलती है. आयुर्वेदिक दवाओं में भी इसका प्रयोग किया जाता है. कहते हैं एक प्रतिशत लहसुन का अर्क मच्छरो से 8 घंटे तक सुरक्षा करता है. इसमे तत्व के रूप में विटामिन सी एवं प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाई जाती है. इसमे कीट नाशक गुण भी पाये जाते है. इसका उपयोग हाई बल्ड प्रैशर, पेट के विकारों, पाचन विकृतियों, फेफड़े के लिए, कैंसर, गठिया की बिमारी, नपुंसकता तथा कई खून की बीमारियों के लिए होता है, इसमें एण्टीबैक्टीरिया तथा एण्टीकैंसर गुणों के कारण बीमारियों में प्रयोग में लाया जाता है



जलवायु

लहसुन की खेती के लिए समशीतोषण जलवायु उत्तम होती है. इसकी खेती रबी मौसम में की जाती है. इसके लिए न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी की आवश्यकता होती है. छोटे दिन इसके कंद निर्माण के लिए अच्छे होते है इसकी सफल खेती के लिए 29.76-35.33 डिग्री सेल्सियस तापमान 10 घंटे का दिन और 70 % आद्रता उपयुक्त होती है समुद्र तल से 1000-1400 मीटर तक कि ऊंचाई पर इसकी खेती कि जा सकती है





भूमि

इसके लिए उचित जल निकास वाली दोमट भूमि अच्छी रहती है भारी भूमि में इसके कंदों का समुचित विकास नहीं हो पाता है. अच्छी जल निकास व्यवस्था वाली रेतीली दोमट मिट्टी लहसुन की खेती बलुई दोमट से लेकर चिकनी दोमट मिट्टी  जिस में जैविक पदार्थों की मात्रा अधिकं हो जिसका पी.एच. मान 6 से 7 तक हो में भी की जा सकती है.





प्रजातियाँ

भारत में लहसुन कि अधिकतर स्थानीय किस्में ही उगाई जाती है क्योंकि उसकी उन्नत किस्मों के विकास पर कम ध्यान दिया गया है लहसुन कि गांठों कि संख्या और नाम के आधार पर किस्मों के नाम दिए जाते है गांठों के आधार पर एक गांठ और अनेक पुत्तियों वाली किस्मे प्रमुख हैं अनेक पुत्तियों वाली किस्मों में मदुराई पर्वतीय लहसुन , मदुराई मैदानी लहसुन , जामनगर लहसुन , पूना लहसुन , नासिक लहसुन आदि प्रमुख है. अधिक पैदावार पाने हेतु उन्नतशील प्रजातियों को उगाना चाहिए जैसे कि एग्रीफाउंड ह्वाइट जिसे जी.41, यमुना सफ़ेद या जी.1, यमुना सफ़ेद2 जी 50, यमुना सफ़ेद3 जी 282, पार्वती जी 32, जी 323, टी 56-4, गोदावरी, श्वेता, आई. सी. 49381, आई. सी.42889 एवं 42860 आदि.
लहसुन दो प्रकार का होता है एक सफ़ेद और दूसरा लाल. खाने के लिए सफ़ेद लहसुन का ही इस्तेमाल किया जाता है जबकि लाल लहसुन में अधिक कड़वाहट होने के कारण इसका औषधियों में इस्तेमाल किया जाता है. सफ़ेद लहसुन की प्रमुख किस्मों का उल्लेख निम्न है





छोटी गांठो वाली किस्में – तहीती, टाइप -56-4 .
बड़ी गांठो वाली किस्मे -

रजाली गद्दी,फावरी सोलन,उत्तरी भारत में विशेष रूप से निम्न किस्मे उगाई है जाती -
नासिक लहसुन , हिसार स्थानीय , सोलन , अगेती कुवारी , 56टाइप -4 , को . 2

बीज बुवाई या पौधरोपण

बुवाई का समय



मैदानी क्षेत्रों में                                         सितम्बर से नवम्बर तक
पहाड़ी क्षेत्रों में                                          मार्च से मई तक
बीज की मात्रा
लहसुन की अधिक उपज के लिए डेढ़ से 2 क्विंटल स्वस्थ कलियाँ प्रति एकड़ लगती हैं। कलियों का व्यास 8-10 मिली मीटर होना चाहिए। बीज को बोने से पहले कैरोसिन या गोमूत्र या ट्राईकोडरमा द्वारा उपचारित करके बोना चाहिए |
खेत की तैयारी
पहली जुताईदेशी हल से करके दो-तीन जुताई कल्टीवेटर से करने के बाद खेत को भुरभुरा एवं समतल बना लेना चाहिए तथा 25 से 30 कुंतल सड़ी गोबर की खाद या कम्पोस्ट की खाद जुताई करते समय प्रति एकड़  की दर से अच्छी तरह से मिला देना चाहिए.
बुवाई की विधि

लहसुन की बुवाई कुढ़ों में छिटकवां डबलिंग विधि से की जाती है अच्छी उपज के लिए लहसुन की बुवाई डबलिंग विधि से करनी चाहिए इसके लिए दूरी निम्न प्रकार से रखनी चाहिए

पंक्ति से पंक्ति की 15 दूरी पंक्ति से.मी.

पौध से पौध की 7.5 दूरी से.मी.

बोने की गहराई - 5 से.मी.
खाद व उर्वरक
लहसुन की बुबाई से पहले ही गोबर की सडी खाद दे दी जाती है बुबाई के समय अन्य कीड़ी प्रकार की खाद की जरुरत नही होती है बोबई के 15 दिन पश्चात निराई के समय नीम की खली डाल देते है जीवामर्त का छिड्काब कर देते है
यदि किसान भाई रासायनिक खाद का प्रयोग करते हैं तो खेत की तैयारी के समय 20 टन गोबर की सड़ी हुई खाद देने के अलावा 20 किलोग्राम नाइट्रोजन, 20 किलोग्राम फास्फोरस व 20 किलोग्राम पोटाश रोपाई से पहले आखिरी जुताई के समय मिट्टी में अच्छी तरह मिलाएँ। 20 किलोग्राम नाइट्रोजन बिजाई के 30-40 दिनों के बाद दें।
सिंचाई
गांठों के समुचित विकास के लिए भूमि में पर्याप्त नमी का होना अत्यंत आवश्यक है बुवाई के तुरंत बाद सिचाई कर दें सर्दियों में 10-15 दिनों के अंतर पर और गर्मियों में 5-7 दिनों के अंतर पर सिंचाई होनी चाहिए।
खरपतवार नियंत्रण

खरपतवारों कि रोकथाम के लिए इसकी -निराई गुड़ाई अवश्य करें पहली निराई गुड़ाई हैण्ड हैरो या खुरपी द्वारा बोने के 20-25 दिन बाद करें इसके बाद दूसरी निराई - गुड़ाई इसके पहली के 20-25 दिन (कुल 40-50 दिन ) बाद करें इसके बाद निराई गुड़ाई कि क्रिया नहीं करनी चाहिए

कीट नियंत्रण
थ्रिप्स
ये कीड़े छोटे और पीले रंग के होते है जो पत्तियों पर सफ़ेद धब्बा बना देते है ये कीड़े पत्तियों का रस चूसते है .
रोकथाम

10 लीटर गोमूत्र रखना चाहिए। इसमें ढाई किलोग्राम नीम की पत्ती को छोड़कर इसे 15 दिनों तक गोमूत्र में सड़ने दें। 15 दिन बाद इस गोमूत्र को छान लें फिर छिड़काव करें  |

बैंगनी धब्बा

यह रोग आल्टरनरिया पोरी द्वारा होता है पत्तियों और तने पर - छोटे छोटे गुलाबी रंग के धब्बे पड़ जाते है .

रोकथाम

40-50 दिन पुराना 15 लीटर गोमूत्र को तांबे के बर्तन में रखकर 5 किलोग्राम धतूरे की पत्तियों एवं तने के साथ उबालें 7.5 लीटर गोमूत्र शेष रहने पर इसे आग से उतार कर ठंडा करें एवं छान लें फिर फसल में तर-बतर कर छिड़काव करें  |

प्याज का कंडुआ रोग

यह रोग यूरोसाईटिस सपुली नामक फफूंदी के कारण होता है बीज के स्थान पर काले रंग के पिंड बन जाते है जो इस रोग के जीवाणु होते है .



रोकथाम

इसकी रोकथाम के लिए बीज को कैरोसिन या गोमूत्र द्वारा उपचारित कर बोना चाहिए .
स्टेमफिलियम ब्लाईट
यह पत्तियों का प्रमुख रोग है आर्द्र मौसम में यह रोग अधिक लगता है यह रोग फफूंदी के कारण होता है .





रोकथाम

मदार की 5 किलोग्राम पत्ती 15 लीटर गोमूत्र में उबालें। 7.5 लीटर मात्रा शेष रहने पर छान लें फिर फसल में तर-बतर कर छिड़काव करें |





उपरोक्त बिमारियों की रोकथाम रासानिक की दशा में  इंडोफिल एम् 45 या कॉपर अक्सिक्लोराइड 400-500 ग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से ले कर 200-500 लीटर पानी में घोल कर और किसी चपकने वाले पदार्थ (सैलवेट 99, 10 ग्राम, ट्रीटान 50 मिलीलीटर प्रति 100 लीटर ) के साथ मिला कर 10-15 दिनों के अन्तराल पर छिड़कें।

खुदाई

फसल तैयार हो जाने पर पत्तियां पिली पड़कर मर जाती है कंदों को पौध सहित भूमि से - उखाड़ लिया जाता है इसके बाद पत्तियों के ऊपर से बांध कर - छोटे छोटे बण्डल बनाकर रख दिया जाता है 2-3 दिन में धुप में सुखाकर तत्पश्चात ऊपर का भाग काट दिया जाता है | जिन्हे

उपज

लहसुन कि उपज उसकी जातियों , भूमि और फसल कि देख - रेख पर निर्भर करती है प्रति हेक्टेयर 100 से 200 क्विंटल उपज मिल जाती है जूनागढ़ में लहसुन कि उपज जी.जी. 2 कि अधिकतम उपज 8.8 टनप्राप्त हुयी

Saturday, October 14, 2017

जीरा के प्रमुख रोग एवं उनका जैविक उपचार

जीरा के प्रमुख रोग एवं उनका जैविक उपचार



संसार में बीज मसाला उत्पादन तथा बीज मसाला निर्यात के हिसाब से भारत का प्रथम स्थान है। इसलिये भारत को मसालों का घर भी कहा जाता हैं। मसाले हमारे खाद्य पदार्थों को स्वादिष्टता तो प्रदान करते ही है साथ ही हम इससे विदेशी मुद्रा भी अर्जित करते हैं। जीरा व सौंफ की मुख्य फसलें है, इनमें कई रोग लग जाते हैं जिससे इन बीज मसालों के उत्पादन के साथ गुणवता भी गिर जाती है तथा निर्यात प्रभावित होता है। इन फसलों के रोग तथा इनका प्रबन्धन इस प्रकार है
जीरा
जीरा कम समय मे पककर अधिक आमदनी देने वाली रबी की फसल है। इसका मसालों तथा कई दवाइयों में उपयोग होता है। प्रति वर्ष जीरे में रोगों के प्रकोप से बहुत हानि होती है। यदि फसल पर इन रोगों के लक्षण से पहचान कर रोकथाम की जाय तो किसानों को जीरे का भरपूर उत्पादन प्राप्त हो सकता है। जीरे की फसल में तीन प्रमुख रोग लगते है।
उखटा (विल्ट)
यह रोग ‘फ्यूजेरियम आक्सीस्पोरम कुमीनाइ ÓÓ नामक कवक से होता है। इस रोग का प्रकोप पौधों की किसी भी अवस्था में हो सकता है परन्तु युवावस्था में ज्यादा होता है। जीरे में होने वाले रोगों में यह ज्यादा हानिकारक होता हैं क्योंकि इसके भयंकर प्रकोप से पूरी फसल नष्ट होती है। पहले वर्ष यह बीमारी कहीं कहीं पर खेत में आती है फिर प्रतिवर्ष बढ़ती रहती हैै और तीन वर्ष बाद उस क्षेत्र में जीरा की फसल लेना असम्भव हो जाता है।
लक्षण: यह बीमारी भूमि एंव बीज के साथ आती है। रोग के सर्वप्रथम लक्षण उगने वाले बीज पर आते हैं तथा पौधा भूमि से निकलने के पहले ही मर जाता है। फसल पर रोग आने से रोगग्रस्त पौधे मुरझा जाते हैं। रोग का प्रकोप फूल आने के बाद होता है तो कुछ बीज बन जाते है। ऐसे रोगग्रसित बीज हल्के, आकार में छोटे, पिचके हुए तथा उगने की क्षमता कम रखते है। रोगी पौधे कद में छोटे तथा दूर से पत्तियों पीली नजर आती हैं।
रोकथाम
रोग ग्रसित खेत में जीरा न बोयें। बुवाई 15 नवंबर के आसपास करें। रोग रहित फसल से प्राप्त स्वस्थ बीज को ही बोयें। बीजों को गौमूत्र से 200 ग्राम प्रति किलो बीज से उपचारित कर बुवाई करें। कम से कम तीन वर्ष का फसल चक्र (ग्वार-जीरा ग्वार-गेहू-ग्वार-सरसों) अपनायें। बुवाई पूर्व सरसों का भूसा या फलगटी जमीन में मिलाने से रोग में कमी आती है। ट्राइकोडर्मा विरिडी मित्र फफूंद 2.5 किलो प्रति हेक्टेयर गोबर खाद में मिलाकर बुवाई पूर्व भूमि में देने से रोग में कमी होती है। रोग रोधी बीज बोये।
झुलसा (ब्लाईट): यह रोग ‘आल्टरनेरिया बर्नसाईÓ नामक कवक से होता है। फसल मे फूल आने शुरू होने के बाद आकाश में बादल छाए रहें तो इस रोग का लगना निश्चित हो जाता है। फूल आने के बाद से लेकर फसल पकने तक यह रोग कमी भी हो सकता है। मौसम अनुकूल होने पर यह रोग बहुत तेजी से फैलता है।
लक्षण: रोग के सर्वप्रथम लक्षण पौधे भी पत्तियों पर भूरे रंग के धब्बों के रूप में दिखाई देते है। धीरे-धीरे ये काले रंग में बदल जाते है। पत्तियों से वृत, तने एवं बीज पर इसका प्रकोप बढ़ता है। पौधों ने सिरे झुके हुए नजर आते है। संक्रमण के बाद यदि आद्र्रता लगातार बनी रहें या वर्षा हो जाये तो रोग उग्र हो जाता है। यह रोग इतनी तेजी से फैलता है कि रोग के लक्षण दिखाई देते ही यदि नियंत्रण कार्य न कराया जाये तो फसल को नुकसान से बचाना मुश्किल होता है।
रोकथाम: फसल में अधिक सिंचाई नही करें। जीरा में इस रोग के नियंत्रण के लिए फसल पर गैामूत्र 10 लीटर  व नीम की पट्टी 2.5 किलो  व लहसुन  250 ग्राम काढ़ा बना कर छिड़काव करें। स्वस्थ बीजों को बोने के काम में लीजिए
छाछिया (पाउडरी मिल्ड्यू): यह रोग ‘इरीसाईफी पोलीगोनीÓ नामक कवक से होता है। इस रोग में पत्तियों, टहनियों पर सफेद चूर्ण दिखाई देता है जो बाद में पूर्ण पौधे पर फैल जाता है। अधिक प्रकोप से उत्पादन एवं गुणवता कमजोर हो जाते हैं।
रोकथाम: गन्धक चूर्ण 20-25 किलोग्राम/हेक्टेयर का भुरकाव करें या घुलनशील गंधक 2 ग्राम प्रति लीटर पानी या केराथेन एल.सी.1 मि.ली. प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। आवश्यकतानुसार 15 दिन बाद दोहरावें।

जीरे में कीट-व्याधियों के लिए निम्न पौध संरक्षण (स्प्रे सेडयूल) अपनायें:
1 कि.ग्रा. तम्बाकू की पत्तियों का पाउडर 20 कि.ग्रा. लकड़ी की राख के साथ मिला कर बीज बुआई या पौध रोपण से पहले खेत में छिड़काव करें।
गोमूत्र नीम का तेल मिलाकर अच्छी तरह मिश्रण तैयार कर 500 मि. ली. मिश्रण को प्रति पम्प के हिसाब से फसल में तर-बतर कर छिडकाव करें |
प्रथम छिड़काव: बुवाई के 30-35 दिन बाद
द्वितीय छिड़काव: बुवाई के 45 से 50 दिन बाद
तृतीय छिड़काव: दूसरे छिड़काव के 10 से 15 दिन बाद
यदि आवश्यक हो तो तीसरे छिड़काव के 10-15 दिन बाद 25 किलो गन्धक चूर्ण का प्रति हैक्टेयर की दर से भुरकाव करें।

organic farming: 

How to Cool the Heat of Technology

How to Cool the Heat of Technology



The rise of technology in the digital age has meant that a whole host of things are now available and accessible; however, technology brings with it a whole host of risks too, one of which is the possibility of overheating. Whether you are a casual user of technological devices, or a builder of technological devices, you should always factor in the fact that the device is going to get hot, and you should do everything in your power to keep it as cool as possible.

Building Data Centres and Devices
Building data centres and devices is still a very popular activity, whether it be for financial gain or just done as a hobby for pleasure. If you are in fact partial to a bit of DIY when it comes to PCs, then you should consider heat from the moment you start on the venture. One of the first things you have to deal with when building your own computer is its ‘brain’: the processor; and when it comes to the processor, what you should never forget to do is keep it cool.

If you are a newbie in the world of PC and data centre designing and building, then you’re probably wondering how this is done: it’s done by introducing a heatsink. Without such a thing, any processor that is strong enough to work in a modern computer (which is probably the only type of processor you are after) wouldn’t be able to work effectively without one. A heatsink would allow your computer’s processor to be to run multiple programmes at one time without overheating and potentially blowing up, which is never a nice situation. However, heatsinks can’t do the job alone: they have a sidekick that is pivotal to their success.

Heatsinks simply cannot work properly if there isn’t a heat conductive set between it and the processor; this is where its sidekick comes into play: thermal paste. There are a whole host of options when it comes to thermal paste on the market but the Artic Silver 5 AS5-3.5G, the best ranked option on www.ConsumerEssentials.com, is probably the one that should be first sought. In truth, any of them on the list could do the job — what could be detrimental to your building venture, however, is buying a bad thermal paste or applying it incorrectly; advice on how to apply it correctly can be found here.

How to Cool the Heat of Technology

Applying thermal paste

And if you’re not a designer and are simply a user of technological devices, then there are still ways that you can protect yours from overheating. For instance, if you’re living in a country that is prone to heatwaves, and you yourself are prone to taking your business and your device outside, then there are things that you can do to lower the risk of overheating. The sun makes everything hot, and you have to protect any devices you are using in it just as much as you protect your skin from the harmful rays. Tips on looking after a laptop in warm weather include never leaving it in direct exposure to sunlight over a prolonged period of time and protecting the screen at all times by placing a glare screen or laptop hood over it.

Tips on looking after a laptop in warm weather

Be careful when taking laptops outside

So, if you don’t want your device to overheat and blow up on you, then you need to do everything in your power to keep it cool.



Friday, October 13, 2017

आंवला की उन्नत औषधिय खेती

आंवला की उन्नत औषधिय खेती

आंवला एक अत्यधिक उत्पादनशील प्रचुर पोषक तत्वों वाला तथा अद्वितीय औषधि गुणों वाला पौधा है. आवंला का फल विटामिन सी का प्रमुख स्रोत है, तथा शर्करा एवं अन्य पोषक तत्व भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. इसके फलो को ताजा एवं सुखाकर दोनों तरह से प्रयोग में लाया जाता है इसके साथ ही आयुर्वेदिक दवाओं में आंवला का प्रमुख स्थान है. यह भारत का ही देशज पौधा है. आंवला एक ऐसा औषधीय गुण वाला फल है, जिसकी मांग आयुर्वेद में हमेशा से रही है। आज के भाग दौड़ की जिंदगी में लोग एलोपैथिक दवाओं को छोड़ आयुर्वेदिक दवाओं से रोगों का इलाज़ कराने में बेहतरी समझते हैं। आंवला के सर्वोत्तम गुणकारी होने के कारण इसकी मांग भी बढ़ने लगी है। यही कारण है कि आज बड़ी बड़ी कंपनियों में इसकी मांग होने लगी है।जहां तक इसके औषधीय गुण की बात है तो इसमें विटामिन सी प्रचूर मात्रा में पाया जाता है।अपने इसी गुण के कारण इससे कई तरह की दवाईयां जैसे त्रिफला चूर्ण,चय्वनप्राश,ब्रम्हा रसायन मधुमेधा चूर्ण बनती है। इसके अलावा इससे बालों को लिए टॉनिक,शैंपू,चेहरे के लिए क्रीम,दंतमंजन आदि भी वनाये जाते हैं।
औषधीय विशिष्ट लक्षण-स्कर्वी रोधी,मूत्रवर्धक,दात्तरोधी,जैविक रोधी और जिगर को पूष्ट बनाता है। इस लिए इसकी खेती में लाभ है।

जलवायु

आंवला उष्ण जलवायु का बृक्ष है इसकी खासियत ये भी है कि इसे शुष्क प्रेदश में आसानी से उगाया जा सकता है। उपोष्ण जलवायु में भी सफलता पूर्वक उगाया जा सकता है इसके बृक्ष लू और पाले से अधिक प्रभावित नहीं होते है यह 0.46 डिग्री से तापमान सहन करने कि क्षमता रखता है पुष्पन के समय गर्म वातावरण अनुकूल होता है .

भूमि

बलुई भूमि के अतिरिक्त सभी प्रकार की भूमियो में आंवला कि खेती की जा सकती है आंवला का पौधा काफी कठोर होता है  अत सामान्य भूमि जिसका PH मान 9 तक हो उनमे भी आंवला कि खेती कि जा सकती है रेतीली मिट्टी में ना उगायें जिन प्रदेश में बारिस कम होती है वहां आसानी से उगाया जा सकता है।

गड्ढो कि खुदाई और भराई

उसर भूमि में जून में 8-10 मीटर कि दूरी पर एक से सवा मीटर के गड्ढे खोद लेना चाहिए यदि कड़ी परत अथवा कंकर कि तह हो तो उसे खोद कर का अलग कर देना चाहिए अन्यथा बाद में पौधों के बृद्धि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता - मई है बरसात के मौसम में इन गड्ढो में पानी भर देना चाहिए तथा एकत्रित पानी को निकाल कर फेंक देना चाहिए प्रत्यक गड्ढे में 50-60 किलो सड़ी हुयी गोबर कि खाद , 15-20 किलो ग्राम बालू ,8 10 किलो ग्राम जिप्सम और आर्गनिक खाद का मिश्रण लगभग 5 किलो ग्राम भर देना चाहिए भराई के 15-25 दिन बाद अभिक्रिया समाप्त होने पर ही पौधा का रोपण करना चाहिए व सामान्य भूमि में प्रत्येक गड्ढे में 40-50 किलो ग्राम सड़ी गोबर कि खाद और 2 किलो नीम की सड़ी खाद  का मिश्रण और ऊपर वाली मिटटी मिलाकर भर देना चाहिए गड्ढे जमीन के तह से 15-20 से.मी. उंचाई तक भरना चाहिए .

ब्यावासयिक प्रजातियाँ

आंवला के ब्यावासयिक जातियों में चकिया , फ्रांसिस , कृष्ण , कंचन नरेंद्र आंवला -5,4,7 एवं गंगा , बनारसी उल्लेखनीय है ब्यवसायिक जातियों - चकैया एवं फ्रांसिस से काफी लाभार्जन होता है .
बनारसी, कृष्णा, NA, फ्रांसिस, 7NA, AA 6 , चकैया,
उपोरोक्त किस्म के अतिरिक्त आगरा से निकली किस्म बलवंत आंवला तथा गुजरात से बिकसित -1 आनंद , आनंद -2, आनंद -3 भी उगाई जा रही है .

पौधरोपण

पौध रोपण के लिए गड्ढे जून में खोदते है गड्ढे का 1 गुणा 1 गुणा 1 मीटर आकार रखते है  गड्ढे की दूरी किस्म के अनुसार 8-10 मीटर रखते है पौधे वर्गाकार बिधि से लगाते है गड्ढे कि भराई के समय प्रति 25 किलो ग्राम गोबर कि सड़ी खाद और 5 नीम की खली का मिश्रण 2 गड्ढा किलो और गड्ढे से निकाली हुयी मिटटी 10 मिलाकर से.मी. उचाई तक भरकर सिंचाई कराते है ताकि गड्ढे कि मिटटी अच्छी तरह से बैठ जाये इन्ही गड्ढो में जुलाई से सितम्बर के बीच में या उचित सिंचाई का प्रबंध होने पर जनवरी से मार्च के बीच में पौध रोपण का कार्य किया जाता है रोपण कार्य जनवरी से फ़रवरी में करने पर अच्छी सफलता मिलती है चूँकि आंवले में स्वयं बंध्यता पाई जाती है अत: कम से कम दो किस्मे अवश्य लगाते है जो एक दूसरे के लिए परागण कर्ता का कार्य करती है आंवला के बाग में 5% परागड़ किस्मे लगाने से अच्छी उपज प्राप्त होती है

खाद एवं उर्वरक

50कु.गोबर की सड़ी खाद 20 किलो ग्राम नीम  50 किलो ग्राम अरंडी कि खली इन सब खादों को अच्छी तरह मिलाकर मिश्रण 2 किलो प्रति पौधा 6 से 12 साल के पौधे में से 1 साल 5 साल तक पौधों के लिए से 3 से 5 किलो प्रति पौधा साल में दो बार - जनवरी फ़रवरी और दूसरा आधा जुलाई माह में जब फलो का विकास हो रहा हो देना अत्यंत आवश्यक 12 साल के ऊपर के पौधों को उम्र के हिसाब से प्रति वर्ष आधा किलोग्राम के हिसाब से देना चाहिए जैसे कोई पौधा है 20 साल का है उसको 10 किलो ग्राम खाद देना चाहिए है . फूल आने से 15-20 दिन पहले एमिनो एसिड फोल्विक एसिड पोटेसियम होमोनेट 1 : 2 : 2 के अनुपात में मिलाकर 250 से 300 मिली. 20 लीटर पानी में मिलाकर तर बतर करके छिड्काब करें
रासायनिक खाद की दशा में

नाईट्रोजन 90 225 किलोग्राम
फॉस्पोरस 120 300 किलोग्राम
पोटाश 48 120 किलोग्राम प्रति एकड

सिंचाई

सामान्यत पौधों को शीत ऋतु में 10-15 दिन के अंतर पर तथा ग्रीष्म ऋतु में 7 दिन के अंतर पर सिंचाई करते है फूल आने के समय - फरवरी मार्च में सिंचाई नहीं करनी चाहए अप्रैल से जून तक सिंचाई का बिशेष महत्व है टपक सिंचाई से आंवला में अच्छी उपज होती है तथा खरपतवार भी कम उगते है .



कटाई छटाई

तीन चार स्वस्थ्य और मुख्य तनों को छोड़कर दिसंबर में छंटनी कर दें अच्छी उपज हेतु निराई गुड़ाई करते रहना अति आवश्यक है थाले कि सफाई के लिए अच्छी तरह से गुड़ाई कर खरपतवार निकालते रहते है थाले के चारो ओर पलवार बिछा देने से खरपतवार कम हो जाते है तथा नमी संरक्षित रहती है .

कीट नियंत्रण

छाल भक्षक कीट
उन उद्यानों में जहाँ - देख रेख कम होती है इसका प्रकोप ज्यादा होता है यह शाखाओ व तने में छेद कर उनके अन्दर पहुँच कर हानी पहुंचाता है इसके नियंत्रण के लिए प्रभावित भाग को खुरच कर साफ कर देते है तथा कीट द्वारा बनाये गए छिद्र में मिटटी का तेल डाल कर ऊपर से गीली मिटटी लगा देते है .
गांठ बनाने वाला कीट
यह कीट जुलाई सितम्बर माह में शाखा के शीर्ष भाग में छिद्र बनाकर भीतर बैठ जाता है प्रभवित शाखा का अग्रिम भाग बाहर कि तरफ उभार कर गांठ के रूप में दिखाई देता है फलत शीर्ष कलिका मर जाती है तथा पौधे कि वृद्धि रुक जाती है इसके नियंत्रण हेतु जिन शाखाओ में गांठ बन जाती है उन्हें काटकर नष्ट कर देते है तथा वर्षा ऋतु में नीम के पत्ती का उबला पानी घोल का छिड़काव कर देते है .
माहू
यह मुलायम शाखाओं और पत्तियों का रस चूस कर हानि पहुचता है पौधे पर नीम के पत्ती का उबला हुआ पानी घोल का छिडकाव करने से यह कीट मर जाता है .
अनार कि तीतल
कभी कभी ये आंवले पर भी आक्रमण करती है यह फलों में छेद बनाकर नुक्सान पहुंचाती है तथा प्रभावित फल गिर कर नष्ट हो जाते है नियंत्रण के लिए प्रभावित फलो एकत्रित कर नष्ट कर देते और नीम का उबला हुआ पानी का छिड़काव करते है आंवले का बाग अनार के बाग से दूर लगना अच्छा रहता है .

रोग नियंत्रण

रतुवा
यह रोग रेवेनेलिया इम्बलिका नामक कवक से होता है इससे पत्तियां और फल दोनों प्रभावित होते है पत्ती और फलो पर भूरे धब्बे बन जाते है तथा प्रभावित फल गिर जाते है इसकी रोकथाम के लिए उबला हुआ नीम कि पत्ती का पानी का पम्प द्वारा तर बतर कर छिड़काव करते है
फल सडन
यह रोग पेनिसिलियम आक्जेलिकम तथा एस्पर्जिलास नाइजर कवको से होता है इसका प्रकोप मुख्यत बाजार भेजते समय या भण्डारण में होता है प्रभावित फलो पर जलशिक्त भूरे रंग के धब्बे बनाते है जो पुरे फल को ढक लेते है धब्बे पुराने पड़ने पर नीले रंग के हो जाते है नियंत्रण के लिए खरोंच लगे फलो को बाजार भेजने या भण्डारण करने के लिए नहीं रखते है फलो को बोरेक्स 4% या सुहागा के या नमक के  घोल से उपचारित करते है
नीम का पानी
25 ग्राम नीम कि पत्ती तोड़कर कुचलकर पीसकर 50 लीटर पानी में पकाए जब पानी 20-25 लीटर रह जाय तब उतार कर ठंडा कर सुरक्षित रख ले आवश्यकता अनुसार किसी भी तरह का - कीट पतंगे मछर , इल्ली या किसी भी तरह का रोग हो किलो 1 लीटर लेकर 15 लीटर पानी में मिलाकर पम्प द्वारा तर बतर कर छिड़काव करे .

तुड़ाई

फल के अनुसार नवम्बर से लेकर फरवरी तक पकते रहते है तुड़ाई उसी समय करते है जब छिलका का रंग चमक दार हरापन लिए हुए पिला हो जाय तुड़ाई हाथ से करना चाहिए जिससे फलो को खरोच न आये

उपज

आंवला कि उपज इसकी प्रयुक्त प्रजाति भूमि स्थित तथा पोषक तत्व के प्रबंध पर निर्भर करती है परन्तु सामान्य अवस्था 10 से 12 वर्ष पुराने पेड़ से में 150 से 200 किलो ग्राम फल प्राप्त किये जाते है .
भण्डारण
कमरे के तापमान पर आंवला के फलो को 7-9 दिन तक भंडारित किया जा सकता है इसके भण्डारण काल 0-1.6 डिग्री से को . तपान तथा 85-90 % सापेक्ष आद्रता पर 18-20 दिन तक बढ़ाया जा सकता है आंवला के फल 15% नमक के घोल में 75 दिनों तक भंडारित किये जा सकते है .